Tag: Shayari of Mirza Ghalib
0
aah ko chahiye ik umr asar hote tak
2

aah ko chāhiye ik umr asar hote tak kaun jiitā hai tirī zulf ke sar hote tak dām-e-har-mauj meñ hai halqa-e-sad-kām-e-nahañg dekheñ kyā guzre hai ...

0
कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना
1

कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,दुनिया को बता कर क्या करना।तुम साथ निभाओ चाहत से,कोई रस्म निभा कर क्या करना।तुम ...

0
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.
2

https://www.youtube.com/embed/7D_GtTVH3hg टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.बात छोटी सी है मगर जान,निकल जाती हैमुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,पर सुना है ...