जो कभी हो नहीं सकता …….
जो कभी हो नहीं सकता मेराफिर क्यों वही अपना लगता है।
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
जो कभी हो नहीं सकता मेराफिर क्यों वही अपना लगता है।
एक खलिश मेरे दिल में कुछ यु रह गयीज़िन्दगी मैं ज़रा ज़िन्दगी कुछ कम रह गयी।
घर से दूर मैं आसमा नापने निकलापर एक घोसला हर शाम याद आता है।
कोई सुबह हो ऐसी तेरा दीदार होकोई शाम तो ऐसी आये जो तू साथ हो।
जब जबाब ख़ामोशी मैं हो तोलफ्ज़ो से उलझना क्यों।
आप वापस आने की जहमत मत करनानाक़द्रों को भूल जाना अत है हमें। 1Like2:59 pm
ये चाँद की रौशनी मुझे हर रोज़ कहती हैकुछ किस्से मोहोब्बत के पूरा हुआ नहीं करते।
ये सोचो का ताल्लुक उनसे जुदा नहीं होतादेखा है कई बार हमने सांसो को रोक के।
ये ज़िन्दगी हमसे कुछ खफा खफा हैकौन सी ये अदा इसकी पहली दफा है।
कुछ झूठे ख्वाबकुछ अधूरी खवाहिशेज़िंदा रहने के लिएकुछ तो सामान चाहिए।