तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है

तुम्हारा ज़र्फ़ है तुम को मोहब्बत भूल जाती है,हमें तो जिस ने हँस कर भी पुकारा याद रहता है,मोहब्बत में जो डूबा हो उसे साहिल से क्या लेना,किसे इस बहर में जा कर किनारा याद रहता है।