फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो

फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो

फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो,

जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,

जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ,

आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।

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    Real Shayari Ek Koshish hai Duniya ke tamaan shayar ko ek jagah laane ki.

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