सफर ऐ जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है

सफर ऐ जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है
बेगाने है ये सब जो अपनापन जताते है
छोड़ जायँगे ये साथ एक दिन तेरा राहो में
वो जो आज खुद को तेरा हमसफ़र बताते है

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply