मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

अगर लोग यूँ ही कमियां निकालते रहे तो,
एक दिन सिर्फ खूबियाँ ही रह जायेगी मुझमें।

दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को है हमसे पर,
ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी।

​मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​,
​मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकल के देख​।

हमको आज़माने की ज़ुर्रत नहीं किसी की,
हम खुद अपनी तक़दीर लिखते है,
खुदा की लिखावट को बदलना तो हमारी फ़ितरत है,
हार को जीत में बदल कर हाथो की लकीर बदलते है!!

उसे भूल कर जिया तो क्या जिया,
दम है तो उसे पाकर दिखा,
लिख पत्थरो पर अपने प्रेम की कहानी,
और सागर को बोल,
दम है तो इसे मिटा कर दिखा!!

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते क्यों हो,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो।

कई लोग मुझको गिराने मे लगे है,
सरे शाम चिराग भुझाने मे लगे है,
उन से कह दो क़तरा नही मैँ ? समन्द्र हूँ,
डूब गये वो ख़ुद जो डूबाने मे लगे है!

गुजरते लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,
प्यास इतनी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ,
यहाँ पर लोग गिनाते है खूबियां अपनी,
मैं अपने आप में कमियाँ तलाश करता हूँ।

मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​

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