अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं

अनकही सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है

मीलों के फास्लो में , कुछ ठहराव वो लाती है
ग़मो की घरी में वह वक़्त को भुलाती है

जीने की दौड़ भाग में , वो सुकून लाती है
ज़िन्दगी थम सी जाये , वो एहसास दिलाती है

अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
यादों के समादर में , अपना आशियाना बनाती है

मैं बेपरवाह चलता रहा , मंज़िल की राह में
फुर्सत के कुछ पल वो , तोहफे में दे जाती है

सफर -इ -ज़ीस्त की तलाश में , राहों में भटकते हुए
चलते रहने का वो हौसला दे जाती है

अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनाती है

बीतें लम्हों के कुछ पल वो सामने लाती है
जीतने की वो , कशिश पैदा कर जाती है

हर एक हार में . वो सबक सिखाती है
बढ़ते रहने की हिम्मत , वो मुझमे लाती है

अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनती है

वक़्त की तेज़ रफ़्तार में वो , दौड़ना सिखाती है
हर एक राह में वो शाइस्तगी लाती है

यूँ मायूस होकर न बैठ इरफ़ान , ज़िन्दगी अभी बाकी है
गिरते हुए हर लम्हे में वो , जीत की झलक दिखाती है

अनकहिं सी कुछ बातें , लम्हों में समां जाती हैं
यादों के समंदर में , अपना आशियाना बनती है |

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