अनदेखे धागों से
अनदेखे धागों से,कुछ यू बांध गया मुझको,कि वो साथ ही नहीं,और हम आजाद भी नहीं|
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
अनदेखे धागों से,कुछ यू बांध गया मुझको,कि वो साथ ही नहीं,और हम आजाद भी नहीं|
बड़ी मुश्किल से बना हूँ,टूट जाने के बाद |मै आज भी रो देता हु,अक्सर मुस्कराने के बाद
मैंने कब कहा कि,वह मिल जाए मुझे?कहीं वो गैर ना हो जाए,बस इतनी सी हसरत है |उन रिश्तो को भी निभाया है मैंने,जिनमें न मिलना,सबसे पहले सर्त थी |
https://www.youtube.com/embed/wviRWEfEBsE याद आने की वजह भी,बहुत अजीब है तुम्हारी|तुम वो गैर थे, जिसने मैंने,पल भर में अपना माना था|
याद तो उन्हें भी आएंगे,वह लम्हे, कि कोई तो था,जब कोई न था|
टूट कर चाहना, और फिर टूट जाना.बात छोटी सी है मगर जान,निकल जाती हैमुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते
तूने तो रुला कर रख दिया ए जिंदगी,जा कर पूछ मेरी मां से कितने लाडले थे हम,न जाने क्यों आज अपना घर मुझे अनजान सा लगता है,तेरे जाने के बाद…
जरा देखो दरवाजे पे,दस्तक किसने दी है?अगर इश्क़ हो तो कहना,यहां दिल नहीं रहता |
चरासाजो की चरसाजी सेदर्द बदनाम तो नहीं होगा?हाँ! दवा दो, मगर ये बतलादो,मुझे आराम तो नहीं होगा?
तेरा वहां है कि मैंने भुला दिया तुझेपर मेरी एक सांस ऐसी नहींजो तेरा नाम ना ले |