Author: Real Shayari

Real Shayari Ek Koshish hai Duniya ke tamaan shayar ko ek jagah laane ki.

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है,
तन्हाई में शहर बसाया करता है,

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है,तन्हाई में शहर बसाया करता है,कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात,दीवारों को दर्द सुनाया करता है,रो देता है आप ही अपनी बातों पर,और फिर खुद…

एक नजर भी देखना गंवारा नहीं उसे,
जरा सा भी एहसास हमारा नहीं उसे,

एक नजर भी देखना गंवारा नहीं उसे,जरा सा भी एहसास हमारा नहीं उसे,वो साहिल से देखते रहे डूबना हमारा,हम भी खुद्दार थे पुकारा नहीं उसे।

अगर ये ज़िद है कि मुझसे दुआ सलाम न हो,
तो ऐसी राह से गुज़रो जो राह-ए-आम न हो।

अगर ये ज़िद है कि मुझसे दुआ सलाम न हो,तो ऐसी राह से गुज़रो जो राह-ए-आम न हो। सुना तो है कि मोहब्बत पे लोग मरते हैं,ख़ुदा करे कि मोहब्बत…

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैंज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं ख़ुशबू जो लुटाती है मसलते हैं उसी कोएहसान का बदला यही मिलता है कली कोएहसान…

सबने मिलाया हाथ यहाँ तीरगी* के साथ
कितना बड़ा मज़ाक हुआ रोशनी के साथ

सबने मिलाया हाथ यहाँ तीरगी* के साथकितना बड़ा मज़ाक हुआ रोशनी के साथ शर्तें लगाईं जाती नहीं दोस्ती के साथकीजिये मुझे कुबूल मेरी हर कमी के साथ तेरा ख़याल, तेरी…

मेरी आँख को यह सब कौन बताने देगा
खवाब जिसके हैं वहीं नींद न आने देगा

मेरी आँख को यह सब कौन बताने देगाखवाब जिसके हैं वहीं नींद न आने देगा उसने यूँ बाँध लिया खुद को नये रिशतों मेंजैसे मुझ पर कोई इलज़ाम न आने…

तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आके
कुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन …

तुम बिन जाऊँ कहाँ, के दुनिया में आकेकुछ न फिर चाहा कभी तुमको चाहके, तुम बिन … देखो मुझे सर से कदम तक, सिर्फ़ प्यार हूँ मैंगले से लगालो के…

इश्क़ वालों से न पूंछो कि
उनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है

इश्क़ वालों से न पूंछो किउनकी रात का आलम तनहा कैसे गुज़रता है जुदा हो हमसफ़र जिसका,वो उसको याद करता है न हो जिसका कोई वो मिलने की फ़रियाद करता…

आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
वो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना

आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़मानावो बाग़ की बहारें वो सब का चह-चहाना आज़ादियाँ कहाँ वो अब अपने घोँसले कीअपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना लगती हो…

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार मेंगुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझेदिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में…