जान कर भी वो हमें जान ना पाये
जान कर भी वो हमें जान ना पाये आज तक वो हमें पहचान ना पाये खुद ही करली बेवफाई हमने उनसे ताकि उन पर वेवफाई का इल्जाम ना आये
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
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जान कर भी वो हमें जान ना पाये आज तक वो हमें पहचान ना पाये खुद ही करली बेवफाई हमने उनसे ताकि उन पर वेवफाई का इल्जाम ना आये
एक नींद है जो रात भर नहीं आती एक नसीब है जो ना जाने कबसे सो रहा है
मेरी चाहत ने उसे ख़ुशी देदी बदले में उसने मुझे सिर्फ ख़ामोशी देदी खुदा से दुआ मांगी मरने की लेकिन उसने तड़पने के लिए जिंदगी देदी
आज खुदा ने फिर पूछा तेरा हसता हुआ चेहरा उदास क्यों है तेरी आँखों में प्यास क्यों है जिसके पास तेरे लिए वक़्त नहीं है वही तेरे लिए खास क्यों…
दिल की धड़कन को अब एक लम्हा सबर नहीं शायद अब उसको मेरी जरा भी कदर नहीं हर सफर में मेरा कभी हमसफ़र था वो अब सफर तो है मगर…
एक पल की जुदाई गवारा कर ना सके ऐसा इश्क़ जो हम दुबारा कर ना सके जिंदगी भर पलट कर देखा ना कभी शिकवा फिर भी हम तुम्हारा कर ना…
पास नहीं हो फिर भी तुम्हें प्यार करते है देखकर तस्वीर तुम्हारी तुमको याद करते है दिल में कैसी तड़प है तुमसे दूर रहकर हर बार तुमसे मिलने की फरियाद…
अपना हमसफ़र बनाले मुझे तेरा ही साया हूँ अपनाले मुझे ये रात का सफर और भी हंसी हो जायगा तू आजा मेरे सपनो में या बुलाले मुझे
दरिया में अपनी कब्र बनाने चला गया सूरज को डूबने से बचाने चला गया तमन्ना तो सबसे आगे निकलने की थी मगर जो गिरे थे उनको उठाने चला गया अपनों…
इंतजार की आरजू अब खो गयी है खामोशियों की आदत अब हो गयी है ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से अगर है तो एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयो से…