उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया
उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया उम्र कट गयी लेकिन हमे प्यार करना नहीं आया उसने हमसे कुछ माँगा वो भी जुदाई और हमे उनसे इंकार करना नहीं…
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
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उसको चाहा लेकिन इजहार नहीं करना नहीं आया उम्र कट गयी लेकिन हमे प्यार करना नहीं आया उसने हमसे कुछ माँगा वो भी जुदाई और हमे उनसे इंकार करना नहीं…
किसी को मोहब्बत की गहराई मार डालती है किसी को मोहब्बत की सच्चाई मार डालती है मोहब्बत करके कोई नई बच पाया आज तक जो बच गया उसको तन्हाई मर…
जल्दी भुला देंगे तुमको थोड़ा सा सब्र तो रखो अंग अंग में बसे हो थोड़ा वक़्त तो लगेगा ही
एक जुर्म हुआ है हमसे हम भी किसी को दिल दे बैठे है अपना उसे समझ कर सब भेद दे बैठे है फिर उसके प्यार के लिए दिल और जान…
मेरे प्यार का भी अब वो इम्तहान लेते है दिल में कितनी जगह है पूछते है चाहते है हम उन्हें खुद से भी ज्यादा वो अब चाहने की भी वजह…
अपनों को दूर जाते देखा है सपनो को चूर होते देखा है लोग कहते है कि फूल कभी रोते नहीं अरे तन्हाइयो में हमने फूलों को भी रोते देखा है
शायद ये दिल तो किसी और के घर का परिंदा है जो सीने में तो रहता है लेकिन हमारे बस में नहीं रहता है
मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है तो जरुरी नहीं कि वो बेवफा है देकर के आपकी आँखों में आँसू अकेले में आपसे ज्यादा वो रोता है
बड़े शोक से बनाया था उसने मेरे दिल में घर और जब रहने की बारी आयी तो ठिकाना बदल लिया
पहला प्यार सबको मिल जाय जरुरी तो नहीं जिसे आप चाहते है वो भी आपको चाहे जरुरी नहीं कुछ लोग बहुत याद करता है दिल वो भी हमें याद करें…