Karz hai tere upar mere sajdo ka

बस इतना ही है मुझको तुमसे कहना..
बड़े अच्छे हो तुम, ख्याल रखा करो अपना..!!

कर्ज है तेरे ऊपर मेरे सजदो का..
मैंने एक अरसे से तुझे खुदा माना है..!! ?
Karz hai tere upar mere sajdo ka..
maine ek arse se tujhe khuda maana hai..!!

सिर्फ ये सोचकर हमने अपनी आस्तीन नहीं झटकी..
ना जाने कितने सांप और सपोले बेघर हो जाएंगे..!

ये इनायते गजब की, ये बला की मेहरबानी…
मेरी खैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी ..!! ??

बहुत सीमेंट है साहब आजकल की हवाओं में..
दिल कब पत्थर बन जाता है पता ही नहीं चलता..!! ??

इससे भी दर्दनाक मंजर क्या होगा वहां..
खंजरों की जगह जुबाने बिक रही हो जहां..!! ?

खामोशी भी अब रास आ गई है..
ज़िन्दगी इसी बहाने पास आ गई है..!!

सजा बन जाती है गुज़रे वक़्त की निशानियां..
ना जाने मतलब के लिए क्यों मेहरबान होते है लोग..!! ???

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