सफर ऐ जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है

सफर ऐ जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है
बेगाने है ये सब जो अपनापन जताते है
छोड़ जायँगे ये साथ एक दिन तेरा राहो में
वो जो आज खुद को तेरा हमसफ़र बताते है

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply

Real Shayari Contest
Start From : 15th Jan
to 10th Feb 2021