हम-हर-उस-इंसान-से

हम हर उस इंसान से

हम हर उस इंसान से नफ़रत करते है,
जिससे वो मोहब्बत करते है,

वो हमारी नज़रों में हर वक्त चुभता है,
जो उनके दिल में बसता है,

हम उस है इंसान को दुश्मन समझते है,
जो उनके हमसे बेहतर दोस्त बनते है,

हमे वो हर साथ नागवारा है,
जिसने उनका हाथ थाम चलना चाहा है,

हमे वो नज़रे रास नहीं आती है,
जो उन्हे हमसे ज्यादा निहारती है,

माना कि उनपर हमारा कोई हक,

बेशक नहीं….

लेकिन वो हमारे कभी नहीं हो सकते,
ये जानकर हम उन्हे चाहना छोड़ दे,

बेशक नहीं

वो उस इंसान के साथ खुश है,
जिसे हम पसंद नहीं करते,
तो उनकी खुशी देखकर हम जले

बेशक नहीं….

लेकिन क्या उन्हे किसी ओर के साथ देख कर बी हम खुश रह सकते है,

शायद नहीं….

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By Real Shayari

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