आओ हम गणतंत्र दिवस पर शहीदों को नमन करें
आओ अपने देश का सम्मान करें शहीदों की कुर्बानियों को याद करें समझें हम अपने कर्तव्यों को मिलकर आओ हम गणतंत्र दिवस पर शहीदों को नमन करें
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
नयी और पुरानी हिंदी शायरी का कलेक्शन, आप इन केटेगरी के बारे में पड़ सख्ते हो इनमे से कुछ है जैसे दर्द, प्यार, फ्रेंडशिप, गम, ज़िंदगी, तन्हाई और गम
आओ अपने देश का सम्मान करें शहीदों की कुर्बानियों को याद करें समझें हम अपने कर्तव्यों को मिलकर आओ हम गणतंत्र दिवस पर शहीदों को नमन करें
नहीं सिर्फ जश्न मनाना नहीं सिर्फ झंडे लहराना यही काफी नहीं है वतन पर यादो को नहीं भूलना जो कुर्बान हुए उनके लफ्जो को बढ़ाना खुद के लिए नहीं जिंदगी…
इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना रोशनी होगी चिरागों को जलाये रखना लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाये रखना
भारत के गणतंत्र का है जग में मान दशकों से खिल रही उसकी अद्भुत शान सब धर्मो को देकर मान रच गया इतिहास का इसलिए हर भारतवासी को है इसमें…
आजादी की कभी शाम ना होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम ना होने देंगे बची है लहू की एक बूंद भी रगों में तब तक भारत माँ का आंचल नीलाम…
तैरना है तो समंदर में तैरो नदी नालों में क्या रखा है प्यार करना है तो वतन से करो इन वेवफा लोगों में क्या रखा है
वतन हमारा मिसाल मोहब्बत की तोड़ता है दीवार नफ़रत की मेरी खुशनसीबी है मिली जिंदगी इस चमन में भुला ना सके खुशबू इसकी किसी भी जन्म में
रास्ते कहा ख़त्म होते है जिंदगी के सफर में मंजिल तो वही है जहाँ ख्वाइशें थम जाए
कितना अजीब अपनी जिंदगी का सफर निकला सारे जहाँ का दर्द अपने मुकद्दर निकला जिसके नाम अपनी जिंदगी का हर लम्हा कर लिया अफ़सोस वही अपनी चाहत से बेखबर निकला
ख्वाबों का सफर हकीकत के साथ निगाहों की तलाश नजर के साथ मंजिल की तलाश इन रास्तों के साथ तकदीर की तलाश ठोकरों के साथ मुमकिन की तलाश नामुमकिन के…