क्यूं खुश हो जाता हु में तुम्हारी ख़ुशी देख के

क्यूं खुश हो जाता हु में तुम्हारी ख़ुशी देख के……!
क्यूं हो जाता हूं मैं हताश तुम्हें उधास देख के ..!

चहक सा उठा हूँ मैं जब मिलने की बारी आती है….!
पर क्यों मिलने के बाद घंटो नींद नहीं आती है……!

आँखें बंद करने से क्यों याद तुम्हारी आती है। ….!
पर जब खुलती है तो क्यों फिर तू सामने आती है….!

आंसू तेरे टपकते है तो मैं क्यों सिसकता हूँ…..!
ज़रा सा तू हस्ती है तोह मैं क्यों निखरता हूँ….!

जब भी देखता हु तुम्हें बस यह सोचता हूँ….!
पुछु तुमसे या तुम्हे कहा रखु दिल में या ये बात कह दूँ…..!

सुन ज़रा बस इतना बता…. !
मैं ऐसा क्यों हूँ
मैं ऐसा क्यों हूँ|

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