User Posts: Real Shayari
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देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
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देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने, क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने। तेरे नीले नीले ...

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दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैंख़ाक ऐसी ज़िन्दगी पे कि पत्थर नहीं हूं मैं
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दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूं मैंख़ाक ऐसी ज़िन्दगी पे कि पत्थर नहीं हूं मैं कयों गरदिश-ए-मुदाम से घबरा न जाये दिलइनसान हूं पयाला-ओ-साग़र नहीं हूं मैं या ...

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ख़ुदा हमको ऐसी खुदाई न देकि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे
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ख़ुदा हमको ऐसी खुदाई न देकि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे ख़तावार समझेगी दुनिया तुझेअब इतनी ज्यादा सफाई न दे हंसो आज इतना कि इस शोर मेंसदा सिसकियों की सुनाई न ...

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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगीयूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगीयूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता जी बहुत चाहता है सच बोलेंक्या करें हौसला नहीं होता अपना दिल भी टटोल कर देखोफासला बेवजह नही होता ...

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एक से हो गए मौसम हो, कि चेहरे सारे
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एक से हो गए मौसम हो, कि चेहरे सारेमेरी आँखों से कहीं खो गया मंजर मेरा किससे पूंछू कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों सेहर जगह ढूंढता फिरता है मुझे घर मेरा ...

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आह को चाहिये इक उम्र असर होने तककौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक
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आह को चाहिये इक उम्र असर होने तककौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक दाम हर मौज में है हलका-ए-सदकामे-नहंगदेखें क्या गुज़रे है कतरे पे गुहर होने तक आशिकी ...

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अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वालाहमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
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अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वालाहमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न थासारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला इक मुसाफिर के ...

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अपने आप जल गयीकल की रात टल गयी
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अपने आप जल गयीकल की रात टल गयीइक धुआं उठा थाफिर राख में बदल गयीबून्द बून्द टपकी शब्सड़कों पर पिघल गयीकल जो रात टल गयीकितना कुछ बदल गयी

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naqsh kī tarah ubharnā bhī tumhī se sīkhā
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naqsh kī tarah ubharnā bhī tumhī se sīkhā rafta rafta nazar aanā bhī tumhī se sīkhā tum se hāsil huā ik gahre samundar kā sukūt aur har mauj se laḌnā ...

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ḳhayāl-o-ḳhvāb huī haiñ mohabbateñ kaisī
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ḳhayāl-o-ḳhvāb huī haiñ mohabbateñ kaisī lahū meñ naach rahī haiñ ye vahshateñ kaisī na shab ko chāñd hī achchhā na din ko mehr achchhā ye ham pe ...

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  1. Hello there. How Can I help you.

  2. Zindagi bahut haseen hai bilkul Jannat ki tarah.
    Bus sahi aankhe chahiye dost unhe dekhne ko