उनका भी हम कभी दीदार करते है
उनका भी हम कभी दीदार करते है उनसे भी कभी हम प्यार करते है क्या करे जो उनको हमारी जरुरत ना थी पर फिर भी हम उनका इन्तजार करते है
Asli Shayari | Sher | Shayar | Ghazal | Nazm
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उनका भी हम कभी दीदार करते है उनसे भी कभी हम प्यार करते है क्या करे जो उनको हमारी जरुरत ना थी पर फिर भी हम उनका इन्तजार करते है
चमन से बिछड़ा हुआ एक गुलाब हूँ में मै खुद ही अपनी तबाही का जवाब हूँ यूँ निगाहें ना फेर मुझसे ऐ मेरे महबूब मैं तेरी चाहतो में ही हुआ…
किसी की यादों को रोक पाना मुश्किल है रोते हुए दिल को मनाना मुश्किल है ये दिल अपनों को कितना याद करता है ये कुछ लफ्जो में बयां करना मुश्किल…
कहाँ जायँगे जिंदगी का कारवां लेकर युहीं रह जायँगे एक तनहा जहां लेकर चाँद तारे जब ओझल हो चुके है नजरो से क्या करंगे हम अब सारा आसमां लेकर
दिल तड़पता रहा और वो जाने लगे संग गुजरे हर लम्हे याद आने लगे खामोश नजरो से जब मुड़कर देखा उसने तो भीगी पलकों से हम भी मुस्कराने लगे
खुशनसीब होते है बादल जो दूर रहकर भी जमीन पर बरसते है और एक बदनसीब हम है जो एक ही दुनिया में रहकर मिलने को तरसते है
बहुत कुछ खो चुके ऐ जिंदगी तुझे सवारने की कोशिश में अब बस जो कुछ मेरा है उसे मेरा ही रहने दे
लिखना था कि खुश है तेरे बगैर भी हम मगर कमब्खत आंसू है कि कलम से पहले चलते है
माना कि मोहब्बत की यह भी एक हकीकत है फिर भी जितना तुम बदले हो उतना नहीं बदला जाता
सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में जब उन्होंने कहा कि प्यार तो है लेकिन तुमसे नहीं